“संसार की नश्वरता पहचानें, आत्मज्ञान से जीवन बनाएं आनंदमय”

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भोपाल। मुमुक्षु मंडल के तत्वाधान में शहर स्थित जैन मति धर्मशाला में आयोजित वात्सल्य मय आत्म आराधना शिविर में आध्यात्मिकता और आत्मचिंतन का अनूठा संगम देखने को मिला। शिविर में विद्वान बाल ब्रह्मचारी सुमत भैया द्वारा समयसार ग्रंथ की व्याख्या करते हुए जैन दर्शन और सिद्धांतों को सरल भाषा में समझाया गया।

प्रवचन के दौरान ब्रह्मचारी सुमत भैया ने कहा कि आज का मानव संसार की नश्वरता को भूलकर बाहरी भौतिक सुखों में उलझ गया है, जिसके कारण वह वास्तविक शांति से दूर होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति सब कुछ जानना चाहता है, लेकिन स्वयं के मूल स्वरूप को जानने की कोशिश नहीं करता। यही अज्ञान जीवन में दुख का कारण बनता है।

उन्होंने आगे कहा कि जीवन को सही दिशा देने के लिए आत्मा को समझना आवश्यक है। जब व्यक्ति अपने भीतर उतरकर आत्मचिंतन करता है, तभी वह वास्तविक आनंद और शांति का अनुभव कर सकता है। उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं को संदेश दिया कि संसार की अस्थिरता को पहचानकर अपने जीवन को आध्यात्मिकता से जोड़ें, जिससे जीवन सार्थक और आनंदमय बन सके।

शिविर में उपस्थित श्रद्धालुओं ने जिनवाणी वंदना कर कार्यक्रम की शुरुआत की तथा सत्पुरुष कानजी स्वामी का स्मरण किया। इसके बाद गुरु वंदना और भक्ति गीतों के माध्यम से वातावरण भक्तिमय हो गया। कार्यक्रम में पाठशाला के बच्चों ने धर्म ध्वजा के साथ विश्व शांति और बंधुत्व का संदेश भी दिया, जिसे सभी ने सराहा।

मुमुक्षु मंडल के मंत्री देवेंद्र बड़कुल और संगठन मंत्री मनोज आर.एम. ने जानकारी देते हुए बताया कि शिविर का उद्देश्य लोगों को आत्मज्ञान की ओर प्रेरित करना और जीवन में आध्यात्मिक मूल्यों को स्थापित करना है।

इस अवसर पर अध्यक्ष अशोक जैन सहित समाज के वरिष्ठ सदस्य कस्तूरचंद्र बजाज (सिलवानी), विनोद जैन, अरुण वर्धमान, अशोक बजाज, उमेश जैन, प्रदीप सोगानी, विपिन जैन, उमरेश सिंघई, सुरेश भज्ज, अजय सोगानी, पदम जैन, मोहित बड़कुल, मनीष जैन सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के अंत में सभी ने आत्मकल्याण और विश्व शांति की कामना के साथ शिविर के संदेश को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।

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