NSA अजीत डोभाल ने मुसलमानों से कहा- हम एक ही जहाज के मुसाफिर हैं, डूबेंगे तो साथ डूबेंगे

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नई दिल्ली

भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल और भारतीय मुस्लिम समुदाय के चुनिंदा लोगों के बीच प्रधानमंत्री कार्यालय में बीते 18 अप्रैल को एक मीटिंग हुई थी। इस मीटिंग में मुस्लिम समुदाय से आने वाले अलग-अलग क्षेत्रों के लोग शामिल थे। इस बैठक के दौरान एनएसए ने कहा कि भारत में रहने वाले हिंदू और मुसलमान एक ही जहाज के मुसाफिर की तरह हैं। आपको बता दें कि इस बैठक का उद्देश्य पारंपरिक वोट-बैंक की राजनीति से परे हटकर मुस्लिम समुदाय के विकास, शिक्षा और उद्यमिता के भविष्य पर चर्चा करना था।

बैठक में उपस्थित मेहमानों को करीब डेढ़ घंटे तक धैर्यपूर्वक सुनने के बाद अजीत डोभाल ने अंग्रेजी और उर्दू के मिश्रण वाली एक प्रभावशाली स्पीच दी। उनके एक वाक्य ने वहां मौजूद सभी लोगों का दिल जीत लिया। डोभाल ने कहा, “हम (हिंदू और मुसलमान) एक ही जहाज पर सवार हैं। हम या तो साथ तैरेंगे या साथ डूबेंगे!”

इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व प्रसिद्ध शिक्षाविद् और व्यवसायी जफर सरेशवाला ने किया। उन्होंने सरकार से समान अवसर की मांग करते हुए कहा, “हम नया भारत का हिस्सा हैं।”

बैठक में कौन-कौन हुए शामिल

जफर सरेशवाला- शिक्षाविद् और व्यवसायी

फारुक पटेल- चेयरमैन, केपी ग्रुप (नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में अरबों डॉलर का साम्राज्य)

इनामुल राकी- सीएमडी, जर्मन स्टील कंपनी (1 बिलियन डॉलर टर्नओवर)

इबरार इराकी- कार्यकारी निदेशक, जर्मन स्टील लिमिटेड

जुनैद शरीफ- सीईओ, निटोन वाल्व्स लिमिटेड

अल्ताफ सादिकोट- वरिष्ठ पदाधिकारी, दाऊदी बोहरा जमात

नईमा खातून- कुलपति, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU)

समीना शेख- जूम टीवी (मीडिया)

सहर भामला- पर्यावरण कार्यकर्ता

डॉ. निशात हुसैन- एम्स (AIIMS) की गोल्ड मेडलिस्ट डॉक्टर

डॉ. जहीर काजी- अध्यक्ष, अंजुमन-ए-इस्लाम (प्रमुख शैक्षणिक संस्थान)

जफर एम. लारी- जीएलएस स्विचगियर्स लिमिटेड

हाजी रयामा- कच्छ (गुजरात) से प्रतिनिधित्व

कौसर जहां- अध्यक्ष, भारतीय हज समिति

अजीत डोभाल की यह पहल दर्शाती है कि राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के भीतर हर समुदाय को सशक्त और आत्मविश्वास से भरपूर बनाना भी इसका हिस्सा है। उद्योग जगत से लेकर शिक्षा और स्वास्थ्य तक फैले इस प्रतिनिधिमंडल ने यह संदेश दिया है कि भारतीय मुस्लिम समुदाय अब केवल राजनीतिक मोहरे के रूप में नहीं, बल्कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ के सक्रिय भागीदार के रूप में अपनी पहचान बना रहा है।

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