रूस की बांडेरोल मिसाइल ने यूक्रेन की एयर डिफेंस सिस्टम की बढ़ाई मुश्किलें

रूस-की-बांडेरोल-मिसाइल-ने-यूक्रेन-की-एयर-डिफेंस-सिस्टम-की-बढ़ाई-मुश्किलें

नई दिल्ली
रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध में तकनीक और हथियारों का स्तर लगातार बदल रहा है. इस कड़ी में रूस द्वारा तैनात की गई नई S8000 बांडेरोल (Banderol) क्रूज मिसाइल ने यूक्रेन की एयर डिफेंस सिस्टम के सामने एक गंभीर संकट खड़ा कर दिया है. यह हथियार पारंपरिक क्रूज मिसाइल और सुसाइड ड्रोन का एक घातक मिश्रण है, जिसका इस्तेमाल हाल ही में कीव पर हुए बड़े हमलों में बड़े पैमाने पर देखा गया है. सुरक्षा विशेषज्ञों और यूक्रेनी खुफिया एजेंसियों के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इस मिसाइल को मार गिराना इतना कठिन क्यों है?

मशीन गन की पहुंच से बाहर
बांडेरोल मिसाइल को मार गिराने में सबसे बड़ी चुनौती इसकी गति और इसका इंजन है. यूक्रेनी रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस मिसाइल की क्रूज गति 520 से 560 किमी/घंटा है, जो अधिकतम 650 किमी/घंटा तक पहुंच सकती है. यूक्रेन की सेना अक्सर मिसाइलों और ड्रोनों को रोकने के लिए मोबाइल फायर टीमों का उपयोग करती है, जो जमीन पर मौजूद भारी मशीन गन से हवाई टारगेट्स पर निशाना साधती हैं.

बांडेरोल की जेट इंजन की वजह से गति इतनी अधिक है कि ये मैन्युअल मशीन गन टीमें इसका पीछा करने और सटीक निशाना लगाने में पूरी तरह बेकार साबित हो रही हैं. इसे रोकने के लिए ‘गेपार्ड’ जैसी अत्यधिक एडवांस और ऑटोमैटिक एंटी-एयरक्राफ्ट प्रणालियों की आवश्यकता होती है, जो तेज गति से चलने वाले लक्ष्यों को ट्रैक कर सकें.  

छोटा आकार और बेजोड़ चालाकी
पारंपरिक रूसी क्रूज मिसाइलों (जैसे Kh-101 या कैलिबर) की तुलना में बांडेरोल का आकार काफी छोटा है. लगभग 5 मीटर लंबाई और 2.2 मीटर विंगस्पैन के साथ यह रडार की नजरों से आसानी से बच निकलती है. यूक्रेनी सैन्य खुफिया विभाग (HUR) की रिपोर्ट से पता चलता है कि यह मिसाइल बेहद कम जगह में मुड़ने के साथ हवा में तेजी से मैन्यूवर कर सकती है. इसकी यही चालकी इसे यूक्रेन के हवाई सुरक्षा रडार और मिसाइल डिफेंस सिस्टम को चकमा देती है, क्योंकि इसके फ्लाइट पाथ का अनुमान लगाना बेहद कठिन होता है.

जैमिंग-रोधी ‘कोमेटा’ एंटीना तकनीक
हवाई सुरक्षा को भेदने के लिए इस मिसाइल में रूस की एडवांस कोमेटा (Kometa) डिजिटल सैटेलाइट नेविगेशन एंटीना प्रणाली का उपयोग किया गया है. यह तकनीक यूक्रेन के इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर यानी जैमिंग सिस्टम को पूरी तरह से बेअसर कर देती है. जब यूक्रेन की सेना मिसाइल के जीपीएस या नेविगेशन को बाधित करने की कोशिश करती है, तो यह जैमिंग-रोधी एंटीना मिसाइल को सुरक्षित रूप से अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने में मदद करता है. इस वजह से इसे बिना भौतिक रूप से नष्ट किए, केवल सिग्नल ब्लॉक करके रोकना लगभग असंभव हो जाता है.   

रूस की बेहतरीन ई-कॉमर्स वाली चालाकी
इस मिसाइल का सबसे चौंकाने वाला पहलू इसका निर्माण और सप्लाई चेन है. यूक्रेन के ‘वॉर एंड सैंक्शंस’ पोर्टल के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद इस मिसाइल में 30 अलग-अलग विदेशी कंपनियों के 20 से अधिक मुख्य पार्ट्स और लगभग 20 माइक्रोचिप्स लगाए गए हैं.

इसमें सबसे महत्वपूर्ण है इसका इंजन- चीन का Swiwin SW800Pro जेट इंजन, जो आमतौर पर रिमोट-कंट्रोल विमानों के लिए उपयोग किया जाता है. यह ई-कॉमर्स वेबसाइट ‘AliExpress’ पर मात्र $16,000 में आसानी से मौजूद है. इसके अलावा, इसमें जापान की मुराता बैटरियां, साउथ कोरिया के डायनामिक्सल सर्वो मोटर्स और अमेरिकी तथा स्विस मूल के वोल्टेज रेगुलेटर और माइक्रोकंट्रोलर्स शामिल हैं.

प्रतिबंधों से बचने के लिए रूस ने आर्मेनिया, कजाकिस्तान, चीन, तुर्की और यूएई जैसे देशों के मध्यस्थों और शेल कंपनियों का एक जटिल नेटवर्क तैयार किया है, जिसके माध्यम से ये कलपुर्जे रूसी वितरकों तक पहुंच जाते हैं.   

बड़े हमलों में रणनीति का हिस्सा
रूस इस मिसाइल का उपयोग स्वतंत्र रूप से करने के बजाय एक सोची-समझी रणनीति के तहत कर रहा है. इसे बड़े पैमाने पर ‘शहीद’ ड्रोनों और भारी बैलिस्टिक मिसाइल के साथ मिलाकर दागा जाता है. जब सैकड़ों हथियार एक साथ यूक्रेन के हवाई क्षेत्र में प्रवेश करते हैं, तो वहां की हवाई सुरक्षा प्रणाली पूरी तरह व्यस्त हो जाती है. ऐसे समय में अपनी गति, छोटे आकार और चपलता के कारण बांडेरोल मिसाइलें सुरक्षा घेरे को तोड़कर नागरिक और बुनियादी ढांचों पर भारी तबाही मचाने में सफल हो जाती हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *