PM मोदी का बड़ा बयान- वैश्विक संकट के दौर में भारत-ऑस्ट्रेलिया की साझेदारी निभाएगी निर्णायक भूमिका

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 मेलबर्न

इंडोनेशिया दौरे के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को ऑस्ट्रेलिया दौरे पर पहुंचे, जहां उन्होंने गुरुवार को मेलबर्न में ऑस्ट्रेलियाई पीएम एंथनी अल्बनीज से मुलाकात की. इसके बाद उन्होंने भारत-ऑस्ट्रेलिया सीईओ फोरम में भाग लिया, जहां उन्होंने दोनों देशों के शीर्ष व्यापारिक दिग्गजों को संबोधित करते हुए भारत के महत्वाकांक्षी ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर लक्ष्यों को साझा किया. पीएम मोदी ने इस वैश्विक मंच से ऑस्ट्रेलिया के विशाल यूरेनियम भंडार, उन्नत तकनीक और 4 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा के पेंशन फंड्स को भारत की विकास यात्रा से सीधे जुड़ने का खुला निमंत्रण दिया। 

पीएम ने कहा कि दुनिया अभी अनिश्चितता, सप्लाई चेन में रुकावट और ऊर्जा संकट के दौर से गुजर रही है. ऐसे वक्त में, भारत और ऑस्ट्रेलिया का स्वाभाविक और भरोसेमंद साझेदार के तौर पर आगे बढ़ना स्वाभाविक और जरूरी है. पिछले कुछ सालों में हमने दोनों देशों की खूबियों का इस्तेमाल करते हुए अपनी भविष्य की साझेदारी के लिए एक मजबूत ढांचा तैयार किया है. 2022 में रिकॉर्ड समय में हुए ECTA (इकोनॉमिक कोऑपरेशन एंड ट्रेड एग्रीमेंट) समझौते ने हमारे आर्थिक रिश्तों को और मजबूत किया है. इसके लागू होने के बाद से भारत से ऑस्ट्रेलिया को होने वाला निर्यात दोगुना हो गया है और दोनों देशों के व्यवसायों को नए बाजार तक पहुंचने का फायदा मिला है। 

उन्होंने कहा कि यहां क्लीन एनर्जी से जुड़ी कई कंपनियां मौजूद हैं. हम भारत में हाइड्रो प्रोजेक्ट्स, ग्रीन हाइड्रोजन, सोलर मॉड्यूल और विंड टर्बाइन के लिए मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम बना रहे हैं. भारत ने 2030 तक 500 गीगावाट रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता हासिल करने और 2070 तक नेट जीरो एमिशन तक पहुंचने का टारगेट रखा है. ऑस्ट्रेलिया की टेक्नोलॉजी, कैपिटल और रिसोर्स इस बदलाव को तेज कर सकते हैं… हमने 2047 तक 100 गीगावाट न्यूक्लियर एनर्जी क्षमता का लक्ष्य रखा है। 

प्राइवेट कंपनियों के लिए खुला न्यूक्लियर सेक्टर
पीएम मोदी ने मंच से बताया कि कुछ महीनों पहले भारत सरकार ने एक ऐतिहासिक कानून के जरिए न्यूक्लियर सेक्टर को देश की प्राइवेट कंपनियों के लिए पूरी तरह खोल दिया है. ऐसे में ऑस्ट्रेलिया के पास मौजूद विशाल यूरेनियम भंडार भारत की इस न्यूक्लियर यात्रा से सीधे जुड़कर दोनों देशों के लिए इस क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का एक ऐतिहासिक अवसर पैदा करते हैं. ऑस्ट्रेलिया के यूरेनियम के विशाल भंडार भारत की न्यूक्लियर यात्रा से सीधे तौर पर मेल खाते हैं। 

इंफ्रास्ट्रक्चर में दिखेगी स्पीड और स्केल
देश के अंदर बुनियादी ढांचे के विकास पर बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में पोर्ट, एयरपोर्ट, रोड, रेलवे और अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर में ऑस्ट्रेलिया के लॉन्ग टर्म इन्वेस्टर्स के लिए अनेक संभावनाएं हैं. आज भारत में नेशनल हाईवेज लगभग 34 किलोमीटर प्रतिदिन की रिकॉर्ड गति से बढ़ रहे हैं. इसके साथ ही भारतीय रेल नेटवर्क में हर दिन 18 किलोमीटर से ज्यादा नए रेलवे ट्रैक्स लगाए जा रहे हैं जो स्केल, स्पीड और स्टेबिलिटी तीनों का एक बेहतरीन संगम है। 

क्रूड स्टील उत्पादन में भारत दुनिया में दूसरे स्थान पर
स्टील सेक्टर के क्षेत्र में दोनों देश पहले से ही एक मजबूत सहयोगी रहे हैं. भारत आज दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा क्रूड स्टील प्रोड्यूसर बन चुका है. पीएम मोदी के अनुसार, दोनों देश मिलकर अब लो कार्बन एल्यूमीनियम, ग्रीन आयरन और क्लीन मैन्युफैक्चरिंग पर काम कर सकते हैं। 

इसके अलावा एआई मिशन, क्वांटम मिशन और सेमीकंडक्टर प्रोग्राम के अंतर्गत भारत सरकार ने दस बिलियन डॉलर से ज्यादा का वित्तीय सपोर्ट दिया है, जिससे मिलकर ग्लोबल सॉल्यूशन तैयार किए जा सकें। 

भारत में निवेश सुरक्षित अमानत
प्रधानमंत्री ने ऑस्ट्रेलियाई वित्तीय संस्थानों को आकर्षित करते हुए कहा कि ऑस्ट्रेलिया के पेंशन फंड्स वर्तमान में 4 ट्रिलियन डॉलर से अधिक की भारी एसेट्स (संपत्ति) मैनेज करते हैं. उन्होंने भरोसा दिलाते हुए कहा कि भारत में आम जनता के पेंशन की बचत को एक अत्यंत पवित्र अमानत माना जाता है. इस वजह से निवेशक पूरी तरह निश्चिंत होकर डेटा सेंटर, एआई, क्वांटम, सेमीकंडक्टर और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में भारत के साथ मिलकर वैश्विक स्तर के समाधान तैयार करने के लिए आगे आ सकते हैं। 

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