भोपाल। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर सुर संदेश म्यूज़िकल परिवार द्वारा अपने परम आदरणीय गुरु संदेश सुले का भावपूर्ण सम्मान किया गया। श्रद्धा, सम्मान और आत्मीयता से ओत-प्रोत इस आयोजन में गुरु-शिष्य परंपरा की अद्भुत छटा देखने को मिली। संगीत साधकों और परिवार के सदस्यों ने अपने गुरु के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए उन्हें सम्मानित किया तथा उनके सान्निध्य को अपने जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि बताया।
समारोह का वातावरण भावनाओं से भरा रहा। उपस्थित सभी सदस्यों ने एक स्वर में कहा कि गुरु केवल संगीत के सुरों का ज्ञान ही नहीं देते, बल्कि जीवन को सही दिशा में जीने की प्रेरणा भी देते हैं। उनके मार्गदर्शन, स्नेह और आशीर्वाद से ही शिष्य अपने जीवन और कला दोनों में आगे बढ़ता है।
गुरु-शिष्य परंपरा का जीवंत उदाहरण बना आयोजन
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोच्च माना गया है। गुरु वह शक्ति हैं जो अपने अनुभव, ज्ञान और संस्कारों से शिष्यों के व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं। सुर संदेश म्यूज़िकल परिवार के लिए भी गुरु संदेश सुले केवल संगीत शिक्षक नहीं, बल्कि प्रेरणास्रोत और मार्गदर्शक हैं, जिन्होंने अनेक विद्यार्थियों को संगीत के साथ-साथ अनुशासन, समर्पण और मानवीय मूल्यों की सीख दी है।
उन्होंने कहा कि संगीत केवल कला नहीं, बल्कि आत्मा को जोड़ने वाला माध्यम है और गुरु संदेश सुले ने वर्षों से अपने सान्निध्य में जुड़े प्रत्येक सदस्य को इसी भावना के साथ संगीत की साधना करना सिखाया है।
भावपूर्ण सम्मान में झलका शिष्यों का अपनापन
गुरु सम्मान समारोह में आदरणीय रणदीवे काका जी, आदरणीय सतीश भाई साहब, वर्मा सर, संजय सर, अरविंद जी, संतोष बैस भैया, मोहंती भाई साहब, अमिताभ भैया, अविनाश भाई, खान साहब, अमित भाई, नंदा ताई, रणदीवे काकू, वसुंधरा ताई, ममता भाभी, सुगंधा भाभी सहित सुर संदेश म्यूज़िकल परिवार के सभी सदस्यों ने पूरे प्रेम, सम्मान और हर्षोल्लास के साथ अपने प्रिय गुरु का अभिनंदन किया।
सदस्यों ने पुष्प अर्पित कर तथा सम्मान स्वरूप अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए गुरु के प्रति कृतज्ञता प्रकट की। समारोह के दौरान गुरु और शिष्यों के बीच आत्मीयता का अनूठा वातावरण देखने को मिला।
‘यह सम्मान नहीं, कृतज्ञता की अभिव्यक्ति है’
कार्यक्रम में उपस्थित सदस्यों ने कहा कि यह सम्मान केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं था, बल्कि उन सभी शिष्यों की भावनाओं की अभिव्यक्ति थी, जिन्होंने गुरु संदेश सुले से संगीत और जीवन के अनेक मूल्य सीखे हैं।
उन्होंने कहा कि गुरु के मार्गदर्शन ने न केवल उनकी गायन क्षमता को निखारने का कार्य किया, बल्कि परिवार के सभी सदस्यों के बीच प्रेम, विश्वास और आत्मीय संबंधों को भी मजबूत किया। सुर संदेश म्यूज़िकल परिवार आज एक परिवार की तरह जुड़ा हुआ है, जिसका आधार संगीत के साथ-साथ गुरु का स्नेह और संस्कार हैं।
‘गुरु का ऋण शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता’
समारोह के दौरान वक्ताओं ने कहा कि गुरु का ऋण कभी चुकाया नहीं जा सकता। गुरु स्वयं तपकर अपने शिष्यों के जीवन को प्रकाशित करते हैं और उन्हें सफलता की राह दिखाते हैं। गुरु का आशीर्वाद ही किसी भी साधक की सबसे बड़ी पूंजी होता है।
सभी सदस्यों ने कामना की कि गुरु संदेश सुले का स्नेह और आशीर्वाद सदैव उन पर बना रहे तथा सुर संदेश म्यूज़िकल परिवार संगीत, संस्कार और आत्मीयता की इसी परंपरा को आगे बढ़ाता रहे।
संगीत के माध्यम से रिश्तों को मिली नई पहचान
कार्यक्रम में यह भी कहा गया कि सुर संदेश म्यूज़िकल परिवार केवल एक संगीत समूह नहीं, बल्कि एक ऐसा परिवार है, जहां संगीत लोगों को दिलों से जोड़ता है। गुरु संदेश सुले के मार्गदर्शन में अनेक कलाकारों ने अपनी प्रतिभा को निखारा है और संगीत के माध्यम से समाज में सकारात्मक संदेश देने का कार्य किया है।
सदस्यों ने विश्वास व्यक्त किया कि भविष्य में भी परिवार इसी प्रकार संगीत साधना, सांस्कृतिक गतिविधियों और सामाजिक समरसता के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाता रहेगा। इसकी जानकारी मनीष चतुर्वेदी ने दी।
गुरु पूर्णिमा पर दिया प्रेरक संदेश
समारोह का समापन गुरु वंदना के साथ हुआ। इस अवसर पर उपस्थित सभी सदस्यों ने एक स्वर में कहा—
“गुरु वह प्रकाश हैं, जो स्वयं जलकर शिष्यों के जीवन को रोशन करते हैं। ऐसे गुरु को शत-शत नमन, बारंबार प्रणाम।”
गुरु पूर्णिमा के इस विशेष अवसर पर पूरे आयोजन ने गुरु-शिष्य परंपरा की गरिमा, भारतीय संस्कृति के मूल्यों और संगीत के प्रति समर्पण की भावनाओं को जीवंत कर दिया।